IMD Weather Warning: नमस्कार किसान साथियों, देश के मौसम में एक बार फिर बड़ा बदलाव देखने को मिलने जा रहा है। लंबे समय से शुष्क हालात झेल रहे कई राज्यों को अब राहत मिल सकती है। मौसम विज्ञानियों के अनुसार उत्तर भारत के ऊपर एक सक्रिय पश्चिमी विक्षोभ प्रभावी हो चुका है, जिसके चलते आने वाले कुछ दिनों में बारिश और पर्वतीय क्षेत्रों में भारी हिमपात की संभावना जताई गई है। यह मौसमी गतिविधि जहां एक ओर रबी फसलों के लिए लाभकारी साबित हो सकती है, वहीं दूसरी ओर इसके बाद तेज ठंड और पाले का खतरा भी बढ़ सकता है।
22 से 24 जनवरी के बीच बदलेगा मौसम का मिजाज
मौसम विभाग की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक 22, 23 और 24 जनवरी के दौरान उत्तर भारत के कई हिस्सों में मौसम पूरी तरह करवट लेने वाला है। खासतौर पर 23 जनवरी को मौसम सबसे ज्यादा सक्रिय रहने की संभावना है। इस दिन को देखते हुए विभाग ने कई राज्यों के लिए ऑरेंज अलर्ट जारी किया है। इसका मतलब है कि बारिश और बर्फबारी की तीव्रता सामान्य से अधिक हो सकती है और लोगों को अतिरिक्त सतर्कता बरतने की जरूरत है।
पहाड़ी राज्यों में भारी हिमपात की चेतावनी
जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड के ऊंचाई वाले इलाकों में इस दौरान भारी से बहुत भारी बर्फबारी हो सकती है। पहाड़ों पर होने वाला यह हिमपात न केवल जल स्रोतों के लिए अहम है, बल्कि मैदानी इलाकों के मौसम को भी सीधे तौर पर प्रभावित करेगा। बर्फबारी के कारण पहाड़ी क्षेत्रों में तापमान तेजी से नीचे गिर सकता है, जिससे जनजीवन और यातायात पर असर पड़ने की आशंका है।
मैदानी इलाकों में बारिश और ठंडी हवाएं
पर्वतीय क्षेत्रों में सक्रिय सिस्टम का प्रभाव पंजाब, हरियाणा, दिल्ली, उत्तरी राजस्थान और पश्चिमी उत्तर प्रदेश में साफ तौर पर देखा जाएगा। इन राज्यों में बादलों की आवाजाही बढ़ेगी और कई जगहों पर मध्यम से भारी बारिश हो सकती है। विशेष रूप से पंजाब और राजस्थान के सीमावर्ती जिलों में रात से ही मौसम बदलने के संकेत मिल सकते हैं। ठंडी और नम हवाओं के कारण ठिठुरन बढ़ेगी और न्यूनतम तापमान में गिरावट दर्ज की जा सकती है।
दिल्ली-एनसीआर में बारिश के आसार
दिल्ली और आसपास के इलाकों में 23 जनवरी को हल्की से मध्यम बारिश होने की संभावना है। यह बारिश जहां एक ओर प्रदूषण के स्तर में अस्थायी कमी ला सकती है, वहीं दूसरी ओर सर्दी को और ज्यादा बढ़ा देगी। बारिश के बाद उत्तर-पश्चिमी हवाएं चलने से राजधानी क्षेत्र में फिर से कड़ाके की ठंड लौट सकती है। सुबह और रात के समय कोहरा भी बढ़ सकता है।
पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिलों पर असर
पश्चिमी उत्तर प्रदेश के मेरठ, मुरादाबाद, सहारनपुर, बरेली और आसपास के जिलों में भी बारिश की संभावना जताई गई है। यहां पर मध्यम बौछारें पड़ सकती हैं, जिससे गेहूं, सरसों और अन्य रबी फसलों को नमी मिलेगी। हालांकि, अत्यधिक बारिश या ओलावृष्टि की स्थिति में फसलों को नुकसान भी हो सकता है, इसलिए किसानों को सतर्क रहने की सलाह दी गई है।
पूर्वी और मध्य भारत में फिलहाल शुष्क मौसम
बिहार, झारखंड, पश्चिम बंगाल और मध्य भारत के राज्यों जैसे मध्य प्रदेश, गुजरात और महाराष्ट्र में फिलहाल मौसम मुख्य रूप से शुष्क बना रह सकता है। हालांकि मौसम विशेषज्ञों का मानना है कि जनवरी के अंतिम सप्ताह तक इन क्षेत्रों में भी हल्की मौसमी हलचल देखने को मिल सकती है। तापमान में मामूली उतार-चढ़ाव और हवाओं की दिशा में बदलाव संभव है।
दक्षिण भारत में भी दिखेगा बदलाव
दक्षिण भारत के कुछ हिस्सों में भी मौसम धीरे-धीरे बदलने के संकेत मिल रहे हैं। तमिलनाडु और केरल के तटीय और दक्षिणी इलाकों में हल्की बारिश शुरू हो सकती है। हालांकि यहां पर किसी बड़े सिस्टम की संभावना कम है, लेकिन स्थानीय स्तर पर नमी बढ़ने से हल्की वर्षा दर्ज की जा सकती है।
किसानों के लिए क्या है खास सलाह
किसान भाइयों के लिए यह मौसम दोहरी चुनौती लेकर आ सकता है। एक ओर बारिश और बर्फबारी से मिट्टी में नमी बढ़ेगी, जो रबी फसलों के विकास के लिए फायदेमंद है, वहीं दूसरी ओर इसके बाद आने वाली तेज ठंड और पाले से फसलों को नुकसान पहुंच सकता है। इसलिए जरूरी है कि किसान समय रहते अपनी फसलों का उचित प्रबंधन करें। ओलावृष्टि की संभावना को देखते हुए तैयार फसलों की सुरक्षा पर विशेष ध्यान दें और पशुओं को ठंड से बचाने के लिए उचित व्यवस्था करें।
आगे के दिनों में लौटेगी कड़ाके की ठंड
मौसम विशेषज्ञों के अनुसार इस बारिश और हिमपात के बाद उत्तर भारत में एक बार फिर तीव्र ठंड का दौर शुरू हो सकता है। ठंडी हवाओं के साथ तापमान में तेज गिरावट देखने को मिलेगी। ऐसे में बुजुर्गों, बच्चों और पशुओं की सेहत का खास ख्याल रखना जरूरी होगा।
निष्कर्ष
कुल मिलाकर आने वाले कुछ दिन मौसम के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण रहने वाले हैं। बारिश, बर्फबारी और उसके बाद ठंड का यह सिलसिला कृषि और आम जनजीवन दोनों पर असर डालेगा। किसान भाई मौसम विभाग के ताजा अपडेट पर नजर बनाए रखें और उसी के अनुसार अपनी कृषि गतिविधियों की योजना बनाएं। समय पर सावधानी और सही प्रबंधन से इस बदलते मौसम को अवसर में बदला जा सकता है।





